Offset printing kya hai ? DTP me iska kya use hai

Offset printing kya hai ? DTP me iska kya use hai :- hello friend yourstudynotes.com में आपका स्वागत है आज कि इस पोस्ट में हम आपको offset printing के बारे में बताने जा रहे है कि offset printing क्या है और डीटीपी में इसका क्या उसे है l तो बने रहिये हमारी इस वेबसाइट पर और इस पोस्ट को पूरा पढ़िए l

Offset Printing Kya Hai ?

Offset printing छपाई (printing ) एक कलात्मक कार्य है जिसे करने हेतु बिभिन्न प्रकार के मेथोड्स का उसे किया जाता है , जैसे क्रेडिल मशीन , offset तथा screen printing का उपयोग छोटे मोटे कार्यो में किया जाता है l जबकि क्रेडिल मशीन का ज्यादा मात्रा में संपन्न किये जाने बाले कार्य को करने में होता है l लेकिन इस printing में कई तरह की कमियों को देखा जा सकता है जैसे समय जादा लगना , छपाई में आकर्षण की कमी होना आदि l

इन सभी कमियों पर सफलता प्राप्त करने हेतु offset printing बाजार में आया जिसने प्रकाशन के क्षेत्र में प्रकाशन को एक नै दिशा दी l offset printing की मदद से बहुत ज्यादा मात्रा के काम को बहुत आसानी और कम समय में किया जा सकता है , क्योकि यह बहुत तेजी से काम करता है और इसकी printing क्वालिटी बाकि सब printing से अच्छी होती है l

आज offset बिभिन्न आकार के आते है जिनसे बिभिन्न size के पोस्टर, pumplate, book छापी जा सकती है offset printing के द्वारा आप सिंगल कलर और multi color printing कार्य किये जाते है l

Working process of Offset printing

ऑफसेट मशीन में मुख्‍यत: तीन सिलेंडर होते हैं, पहले सिलेंडर पर मास्‍टर या प्‍लेट लगाई जाती है, दूसरे सिलेंडर पर रबर की परत होती हैं, जिससे इमेज प्रिन्‍ट की जाती हैं, तीसरे सिलेंडर पर कागज लगता हैं। इसके अतिरिक्‍त स्‍याही को अच्‍छे से मिलाने के लिए विभिन्‍न रबर के रोल होते हैं। ऑफसेट प्रिन्टिग में प्रिन्‍ट करने की निम्‍न विधि हैं।

  1. सबसे पहले जो डाटा प्रिन्‍ट करना हैं, उसे कम्‍प्‍यूटर द्वारा प्‍लास्टिक प्‍लेट पर या बड़ी एक्‍सपोजिंग मशीन द्वारा एल्‍युमीनियम की प्‍लेट पर उतारा जाता हैं।
  2. मशीन के पहले सिलेंडर को मास्‍टर सिलेंडर भी कहा जाता हैं|
  3. जिस रंग में छपाई करना हैं, उस रंग की स्‍याही इंक रोल में डाली जाती हैं। स्‍याही को मशीन में जिस जगह रखा जाता हैं, उस जगह को Ink Dust कहा जाता हैं।
  4. Ink Dust यह एक रोलर से जुड़ा होता हैं, वह रोलर Ink Dust से आवश्‍यकतानुसार स्‍याही लेता रहता हैं।
  5. इंक रोलर अन्य दो दो रोलर से जुड़ा होता हैं, उनमे एक रोलर दांए-बाएं भी घुमता रहता हैं, जिससे स्‍याही अच्‍छे से मिक्‍स हो जाती हैं। दूसरा इंक रोलर प्‍लेट के सिलेंडर से घसते हुए घुमता हैं।
  6. बेस रोल में पानी डाला जाता हैं। इस प्रकार की प्रिन्टिग मे पानी की बहुत अहम भूमिका होती हैं। इस प्रकार की प्रिन्टिंग में जिस हिस्‍से में प्रिन्टिंग होना हैं, वहॉ पर स्‍याही आती हैं, तथा जिस हिस्‍से में प्रिन्‍ट नही होना हैं, उस पर पानी की परत आती हैं। इस तरह से सिर्फ प्‍लेट पर छपा मैटर ही प्रिन्‍ट होती हैं। इससे स्‍याही प्‍लेट पर लग‍ती हैं। प्‍लेट के दूसरे हिस्‍से में पानी का रोल भी जुड़ा होता हैं। स्‍याही और पानी दोनो प्‍लेट पर एक साथ लगती जाती हैं।
  7. अब मशीन को चालू कर दिया जाता हैं। कुछ देर बाद स्‍याही या प्‍लेट सिलेंडर पर आती हैं।
  8. प्‍लेट सिंलेडर यह रबर के सिलेंडर (जिसे ब्‍लांन्‍केट कहा जाता हैं।) से घसते हुए घुमता हैं। इससे प्‍लेट पर लगी हुई स्‍याही रबर के सिलेंडर पर आती हैं।
  9. रबर के सिलेंडर से और एक सिलेंडर लगा होता हैं। उन दोनों के बीच में से पेपर जाता हैं। जो इमेज रबर के सिलेंडर पर आती वह पेपर पर प्रिन्‍ट होती हैं।
  10. प्‍लेट के जिस हिस्‍से में इमेज या टेक्‍स्‍ट हैं, उस पर स्‍याही की परत लग जाती हैं। बाकी हिस्‍से में पानी की परत आ जाती हैं।
  11. प्‍लेट पर जिस हिस्‍से में स्‍याही लगी हैं, उसकी मिरर इमेज दूसरे सिलेंडर पर आती हैं। इस सिलेंडर पर रबर की परत चढ़ी होती हैं।
  12. अंत में रबर की परत वाले सिलेंडर से पेपर पर इमेज प्रिन्‍ट होती हैं।

Advantages of Offset printing (ऑफसेट प्रिन्टिंग प्रणाली के लाभ)

  1. इसमें डाटा साफ एवं स्‍पष्‍ट प्रिंट होता हैं। इसमें टेक्‍स्‍ट के साथ ग्राफिक की भी प्रिन्टिग की जा सकती हैं।
  2. इसकी गति बहुत अधिक होती हैं। यह सामान्‍यत: 1000 पेज प्रति घंटे से 10,000 पेज प्रति घंटे तक प्रिंट कर सकता हैं |
  3. किसी पेज का मास्‍टर बनने के बाद, बहुत कम समय में मशीन पर प्रिन्टिंग चालू कर सकते हैं।
  4. इसमे प्‍लेट बनाने के बाद उस प्‍लेट से एक बार से कितनी भी प्रिन्टिंग की जा सकती है।
  5. इस प्रकार की मशीनों मे स्‍याही की खपत एवं अपव्‍यव बहुत कम होता हैं, इसलिए यह एक सस्‍ती प्रणाली हैं।
  6. इस प्रणाली से की गई प्रिन्टिंग करने के बाद कोई और प्रक्रिया नही करनी पड़ती हैं।
  7. बड़े आकार की प्रिन्टिंग भी की जा सकती हैं।
  8. इस प्रकार की प्रिन्टिंग में बहुत अधिक कुशल व्‍यक्तियों की आवश्‍यकता नही होती हैं।
  9. अधिक मात्रा की प्रिन्टिंग के लिए यह सबसे सस्‍ती प्रणाली हैं।
  10. बहुरंगी प्रिन्टिंग की जा सकती हैं।
  11. प्रिन्टिंग के समय बहुत शोर नही होता हैं, जैसे की Letterpress Printing में होता हैं।

Disadvantages of Offset printing (ऑफसेट प्रिन्टिंग प्रणाली की कमीयॉं)

  1. ऑफसेट मशीन की लागत अधिक होती हैं|
  2. इसमें इलेक्ट्रिक पावर की आवश्‍यकता अधिक होती हैं।
  3. इस प्रिंटिंग के लिए अर्धकुशल कर्मचारियों की आवश्‍यकता होती हैं।
  4. एक बार बनाई प्‍लेट को बार बार प्रयोग नही किया जा सकता हैं।
  5. कम मात्रा की प्रिन्टिंग के लिए महंगी प्रणाली हैं।
  6. फोटो क्‍वालिटी प्रिन्टिंग अच्छी नही होती हैं।